Friday, June 17, 2011

कुछ उदबोधन और जागृति के अक्षर अपने सामने



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  • कुछ उदबोधन और जागृति के अक्षर अपने सामने रखकर जीवन जीओ जिससे आप सामान्य से ऊपर उठ सकें ।

 

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परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज



 


 





Posted By Madan Gopal Garga to
AMRIT VANI at 12/11/2009 09:25:00 PM

Thursday, September 18, 2008

अंत;करण

  • जिसका अंत;करण दोषयुक्त है ,उसे अच्छाई अच्छाई नहीं लगती ,भलाई भलाई नहीं लगती !



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Sunday, October 28, 2007

चादर,संगती


सिंगापुर सत्संग के दौरान आरती।

जीवन के लिए जो चादर मिली है ओढ़ने पर कभी सिर नंगा तो कभी पैर नंगा। इसलिए थोडा हाथ पैर सिकोड़कर सो जाओ यही जीने की विधि है।

सुसंगत मिलने का अर्थ है कि क्रृपाए प्राप्त होने वाली हैं और जब कुसंगति मिल जाय तो समझिए कि कोई बड़ा दुर्भाग्य जाग गया।


Monday, October 22, 2007

कर्म शांति अंहकार

शांति की प्राप्ति का सही रास्ता कर्मों का त्याग नहीं ,वरन कर्मों का सही रूप से सजगता पूर्वक करना है।

The real path to happiness is not in the abondonment of karma, but in performig them with Awareness। karma means your assigned work.

अंहकार की टंकार से प्रतिकार उत्पन्न होता है।

Ego is the root cause of all troubles , let ego go , gone our all troubles।

Thursday, October 18, 2007

Black Ink, doubts, love

** Just as blank ink, in its flow, acquires various shapes; mind, likewise, due to ignorance, assumes different forms।

जिस प्रकार काली स्याही बहकर कोई भी आकार धारण कर लेती है ,उसी प्रकार मन अज्ञानता में बहकर दु:ख आकार -प्रकार धारण कर लेता है !

** At the feet of the Guru doubts are cleared and self experience with yhe guru is shared.

गुरू चरणों में बैठ कर शिष्य करता है शंका समाधान। संशय निवृत कर निज अनुभव में लाता है आत्मज्ञान।

** Love is the manifestation of the self -illumined.

आत्मा प्रकाश है और प्रेम विकास।

Friday, September 7, 2007

अमृत वचन अपनाए जीवन यात्रा सुखद बनाए



अमृत
वचन अपनाए जीवन यात्रा सुखद बनाए

सदैव मस्त और प्रसन्न रहो।

छोड़ना सीखिए, पकड़ना नही।

देने की कामना रखिए, पकड्ना नहीं।

सम्पत्ति को आपत्ति मत बनाओ।

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Sunday, September 2, 2007

Words mingled with Love

Whenever man speaks
He ought to utter words mingled with
The love in his heart and wisdom in his mind
Otherwise, you'll scatter through your words
Only thorns in the world at large.

They will pinch you in your path
And also others in theirs


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